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जानिए ओशो के विचार जिनसे सहमत होना है बड़ा मुश्किल - Indian Astrology

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जानिए ओशो के विचार जिनसे सहमत होना है बड़ा मुश्किल


आध्यात्मिक गुरु ओशो रजनीश 20वीं सदी के महान विचारक थे। उनका जन्म ११ दिसम्बर १९३१ भारत के मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन शहर के कुच्वाडा गांव में हुआ था। वह  भारत व विदेशों में जाकर प्रवचन देते थे। वे दर्शनशास्त्र के अध्यापक थे। उन्होंने अपने क्रांतिकारी विचारों से दुनियाभर के वैज्ञानिकों, बुद्धिजीवियों और साहित्यकारों को प्रभावित किया, लेकिन ओशो के कुछ विचार ऐसे भी हैं जिनसे सभी लोगों का सहमत होना कुछ मुश्किल लगता है। आज हम आपको ओशो के कुछ ऐसे ही विचारों के बारे में बताएंगें जो हमेशा विवादों में तो रहे ही साथ ही लोगों ने इन विचारों का समर्थन करना भी उचित नहीं समझा। तो आइए जानते हैं ओशो के ऐसे विवादित बयानों के बारे में….

-अपने क्रान्तिकारी विचारों से उन्होने लाखों अनुयायी और शिष्य बनाये। अत्यधिक कुशल वक्ता होते हुए इनके प्रवचनों की सैकड़ों पुस्तकें हैं।

– ओशो ने अपने अधिकतर प्रवचनों में गांधीजी की विचारधारा का विरोध किया है। ओशो के अनुसार गांधी जी की विचारधारा आत्मघाती है  और यह विचारधारा  इंसान  को पीछे की ओर ले जाती है।

– ओशो ने हर एक पाखंड पर वार किया। सन्यास की अवधारणा को उन्होंने भारत की विश्व को अनुपम देन बताते हुए सन्यास के नाम पर भगवा कपड़े पहनने वाले पाखंडियों को खूब लताड़ा। उनकी असलियत लोगों के सामने लाने की कोशिश की।

-ओशो ने ईश्वर वादी और ईश्वर -विरोधी दोनों ही विचारधाराओं का विरोध किया। ईश्वरवादी मंदिर, मस्जिद,चर्च, सिनेमा आदि जगहों पर जाकर ईश्वर से चूक गए और ईश्वर विरोधी इनसे लड़कर चूक गए ।

– ओशो की नजर में जब परिवार की जरूरत नहीं तो विवाह गौण हो जाता है।  ओशो के विचारों के अनुसार परिवार की परंपरा को समाप्त कर कम्यून की अवधारणा को स्थापित करना।

– ओशो ने कहा है कि सालों से इंसान के  विश्वास,सिद्धांत, मत बेचे गए हैं, जो कि एकदम छलावा है झूठे हैं, जो केवल तुम्हारी महत्वाकांक्षाओं, तुम्हारे आलस्य का प्रमाण हैं।

– ओशो ने कहा है कि अगर आप एक दर्पण बन सकते हैं तो आप एक ध्यानी भी बन सकते हैं. ध्यान दर्पण में देखने की कला है ।

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